Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.200.82: द्रोणपुत्र जल-धार वाले तीखे बाणों को आगे-पीछे भी चला रहे थे। उनके उन भयंकर बाणों से पृथ्वी, आकाश, अन्तरिक्ष, दिशाएँ तथा अन्तर्दशाएँ भी आच्छादित हो रही थीं। 82. | mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रोणपुत्र जल-धार वाले तीखे बाणों को आगे-पीछे भी चला रहे थे। उनके उन भयंकर बाणों से पृथ्वी, आकाश, अन्तरिक्ष, दिशाएँ तथा अन्तर्दशाएँ भी आच्छादित हो रही थीं। 82.
Drona's son was shooting those sharp arrows with watery edges forward as well as backward. The earth, sky, space, directions and even the sub-directions were covered by those dreadful arrows of his. 82.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥