| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन » श्लोक 8-10 |
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| | | | श्लोक 7.200.8-10  | विकीर्णमस्त्रं तद् दृष्ट्वा तथा भीमरथं प्रति।
उदीर्यमाणं द्रौणिं च निष्प्रतिद्वन्द्वमाहवे॥ ८॥
सर्वसैन्यं च पाण्डूनां न्यस्तशस्त्रमचेतनम्।
युधिष्ठिरपुरोगांश्च विमुखांस्तान् महारथान्॥ ९॥
अर्जुनो वासुदेवश्च त्वरमाणौ महाद्युती।
अवप्लुत्य रथाद् वीरौ भीममाद्रवतां तत:॥ १०॥ | | | | | | अनुवाद | | उस अस्त्र ने भीमसेन के रथ को ढँक लिया था। युद्धभूमि में कोई प्रतिद्वन्द्वी योद्धा न होने के कारण द्रोणपुत्र अश्वत्थामा बलवान होता जा रहा था। समस्त पाण्डव सेना (भय के मारे) शस्त्र त्यागकर मूर्छित हो गई थी और युधिष्ठिर आदि महारथी युद्ध से विमुख हो गए थे। यह सब देखकर महाबली अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण, दोनों वीर योद्धा बड़ी उतावली से रथ से कूद पड़े और भीमसेन की ओर दौड़े। | | | | That weapon had covered Bhimasena's chariot. As there was no rival warrior on the battlefield, Drona's son Ashwatthama was becoming stronger. The entire Pandava army had fallen unconscious (out of fear) by laying down their arms and great warriors like Yudhishthira had turned away from the battle. Seeing all this, the mighty Arjuna and Lord Krishna, both the brave warriors, jumped from the chariot in great haste and ran towards Bhimasena. 8-10. | | ✨ ai-generated | | |
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