श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  7.200.79 
युवराजश्च विंशत्या द्रौणिं विव्याध पत्रिभि:।
पार्थश्च पुनरष्टाभिस्तथा सर्वे त्रिभिस्त्रिभि:॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
चेदिदेश के राजकुमार ने द्रोणपुत्र को बीस बाणों से, अर्जुन को आठ बाणों से तथा अन्य सभी को तीन-तीन बाणों से घायल कर दिया ॥79॥
 
The prince of Chedidesh pierced Drona's son with twenty arrows, Arjuna with eight and all the others with three arrows each. 79॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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