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mahabharat 7.200.76: तब द्रोणपुत्र ने विषैले सर्पों के समान तीखे पच्चीस बाणों से उसके सभी पच्चीसों बाणों को एक साथ काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  7.200.76 
आशीविषाभैर्विंशत्या पञ्चभिस्तु शितै: शरै:।
चिच्छेद युगपद् द्रौणि: पञ्चविंशतिसायकान्॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
तब द्रोणपुत्र ने विषैले सर्पों के समान तीखे पच्चीस बाणों से उसके सभी पच्चीसों बाणों को एक साथ काट डाला।
 
Then Drona's son cut all his twenty-five arrows simultaneously with twenty-five sharp arrows, like poisonous serpents.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)