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mahabharat 7.200.75: उन सतर्क रथियों ने गुरु के क्रोधित पुत्र को बीसवें कदम पर पकड़ लिया और चारों ओर से एक साथ पाँच बाणों से उस पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  7.200.75 
ते विंशतिपदे यत्ता गुरुपुत्रममर्षणम्।
पञ्चभि: पञ्चभिर्बाणैरभ्यघ्नन् सर्वत: समम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
उन सतर्क रथियों ने गुरु के क्रोधित पुत्र को बीसवें कदम पर पकड़ लिया और चारों ओर से एक साथ पाँच बाणों से उस पर आक्रमण किया।
 
Those vigilant charioteers caught hold of the resentful son of the Guru on his twentieth step and attacked him with five arrows from all sides simultaneously. 75.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)