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mahabharat 7.200.74: उन सभी वीरों ने जोर से चिल्लाते हुए अपने-अपने धनुष हाथ में लेकर वीर अश्वत्थामा को चारों ओर से घेर लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  7.200.74 
एते हाहाकृता: सर्वे प्रगृहीतशरासना:।
वीरं द्रौणायनिं वीरा: सर्वत: पर्यवारयन्॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
उन सभी वीरों ने जोर से चिल्लाते हुए अपने-अपने धनुष हाथ में लेकर वीर अश्वत्थामा को चारों ओर से घेर लिया।
 
All these brave men, shouting loudly, surrounded the brave Ashvatthama from all sides with their bows in their hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)