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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  7.200.70 
अथान्येन सुपुङ्खेन शरेणानतपर्वणा।
आजघान भ्रुवोर्मध्ये धृष्टद्युम्नं परंतप:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शत्रुओं को पीड़ा देने वाले अश्वत्थामा ने सुन्दर पंख और मुड़े हुए सिरे वाले दूसरे बाण से धृष्टद्युम्न की भौंहों के बीच में गहरा प्रहार किया।
 
Thereafter, Ashvatthama, that tormentor of enemies, struck Dhrishtadyumna deeply between his eyebrows with another arrow having beautiful wings and a bent tip.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)