Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.200.66: ऐसा कहकर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने सात्यकि पर एक उत्तम बाण चलाया, जो सूर्य की किरणों के समान तेजस्वी और वज्र के समान तीक्ष्ण था; मानो इन्द्र ने वृत्रासुर पर वज्र से प्रहार किया हो। | mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऐसा कहकर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने सात्यकि पर एक उत्तम बाण चलाया, जो सूर्य की किरणों के समान तेजस्वी और वज्र के समान तीक्ष्ण था; मानो इन्द्र ने वृत्रासुर पर वज्र से प्रहार किया हो।
Saying this, Drona's son Ashvatthama shot an excellent arrow at Satyaki, as brilliant as the rays of the sun and as sharp as a thunderbolt; as if Indra had struck Vritrasura with a thunderbolt.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥