श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  7.200.65 
यद् बलं पाण्डवेयानां वृष्णीनामपि यद् बलम्।
क्रियतां सर्वमेवेह निहनिष्यामि सोमकान्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
यदि पाण्डव और वृष्णिगण यहाँ अपनी सारी शक्ति लगा दें, तो भी मैं सोमकों का नाश कर दूँगा ॥65॥
 
Even if the Pandavas and the Vrishnis use all the strength they possess here, I will still destroy the Somakas.' ॥ 65॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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