श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  7.200.58 
एवं तं विरथं कृत्वा सात्यकि: सत्यविक्रम:।
जघान वृषसेनस्य त्रिसाहस्रान् महारथान्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उसे रथहीन करके वीर सात्यकि ने वृषसेन की सेना के तीन हजार विशाल रथों को नष्ट कर दिया।
 
Having thus rendered him chariotless, the valiant Satyaki destroyed three thousand huge chariots of Vrishasena's army. 58
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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