श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  7.200.57 
ततस्ते पाण्डवा राजन् दृष्ट्वा सात्यकिविक्रमम्।
शङ्खशब्दान् भृशं चक्रु: सिंहनादांश्च नेदिरे॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! सात्यकि का पराक्रम देखकर पाण्डवों ने शंख बजाना और जोर से गर्जना करना आरम्भ कर दिया।
 
King! Seeing Satyaki's valour, the Pandavas began blowing their conches and roaring loudly. 57.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas