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mahabharat 7.200.55: तब शत्रु अश्वत्थामा ने दूसरे रथ पर सवार होकर सात्यकि पर कई सौ बाणों की वर्षा करके उसे आगे बढ़ने से रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.200.55 
अथो रथान्तरं द्रौणि: समारुह्य परंतप:।
सात्यकिं वारयामास किरन् शरशतान् बहून्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
तब शत्रु अश्वत्थामा ने दूसरे रथ पर सवार होकर सात्यकि पर कई सौ बाणों की वर्षा करके उसे आगे बढ़ने से रोक दिया।
 
Then the enemy Ashvatthama, riding on another chariot, stopped Satyaki from proceeding further by showering several hundred arrows on him. 55.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)