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mahabharat 7.200.53: राजन! तब सात्यकि ने भी उन समस्त महारथियों को रथहीन कर दिया और क्षण भर में युद्ध से विमुख हो गये।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.200.53 
तत: स सात्यकी राजन् सर्वानेव महारथान्।
विरथान् विमुखांश्चैव क्षणेनैवाकरोन्नृप॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
राजन! तब सात्यकि ने भी उन समस्त महारथियों को रथहीन कर दिया और क्षण भर में युद्ध से विमुख हो गये।
 
King! Then Satyaki also rendered all those mighty car-warriors chariotless and turned away from the battle in a moment. 53.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)