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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 51-52
 
 
श्लोक  7.200.51-52 
दुर्योधनस्तु विंशत्या कृप: शारद्वतस्त्रिभि:।
कृतवर्माथ दशभि: कर्ण: पञ्चाशता शरै:॥ ५१॥
दु:शासन: शतेनैव वृषसेनश्च सप्तभि:।
सात्यकिं विव्यधुस्तूर्णं समन्तान्निशितै: शरै:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने बीस, शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य ने तीन, कृतवर्मा ने दस, कर्ण ने पचास, दु:शासन ने सौ तथा वृषसेन ने सात तीखे बाणों से शीघ्र ही सात्यकि को चारों ओर से घायल कर दिया।
 
Duryodhana with twenty, Sharadvan's son Krupacharya with three, Kritavarman with ten, Karna with fifty, Dushasan with a hundred and Vrishasena with seven sharp arrows very soon wounded Satyaki from all sides. 51-52.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)