श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.200.5 
स हि भीमो रथश्चास्य हया: सूतश्च मारिष।
संवृता द्रोणपुत्रेण पावकान्तर्गताऽभवन्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज! भीमसेन और उनके रथ, घोड़े और सारथि- ये सभी अश्वत्थामा के अस्त्र-शस्त्रों से आच्छादित होकर अग्नि की लपटों के भीतर आ गए॥5॥
 
Honorable King! Bhimsen and his chariot, horses and charioteer – all of them covered with the weapons of Ashwatthama came inside the flames of fire. 5॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd