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mahabharat 7.200.44: प्रजानाथ! तत्पश्चात् पांचाल सेना व्याकुल और व्याकुल होकर भाग गई। उसके सैनिकों ने एक-दूसरे की ओर देखा तक नहीं।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.200.44 
तत: प्रदुद्रुवे सैन्यं पञ्चालानां विशाम्पते।
सम्भ्रान्तरूपमार्तं च न परस्परमैक्षत॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! तत्पश्चात् पांचाल सेना व्याकुल और व्याकुल होकर भाग गई। उसके सैनिकों ने एक-दूसरे की ओर देखा तक नहीं।
 
Prajanath! Thereafter the Panchala army became confused and distressed and ran away. Its soldiers did not look at each other. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)