| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन » श्लोक 40 |
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| | | | श्लोक 7.200.40  | ततो बाणमयं वर्षं द्रोणपुत्रस्य मूर्धनि।
अवासृजदमेयात्मा पाञ्चाल्यो रथिनां वर:॥ ४०॥ | | | | | | अनुवाद | | तत्पश्चात् महारथियों में श्रेष्ठ, अपार आत्मबल से युक्त, पांचालपुत्र धृष्टद्युम्न अश्वत्थामा के मस्तक पर बाणों की वर्षा करने लगे ॥40॥ | | | | After that, Dhrishtadyumna, the son of Panchala, the best among the charioteers, full of immense self-power, started showering arrows on the head of Ashwatthama. 40॥ | | ✨ ai-generated | | |
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