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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.200.4 
यथा रात्रिक्षये राजन् ज्योतींष्यस्तागिरिं प्रति।
समापेतुस्तथा बाणा भीमसेनरथं प्रति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राजन! जैसे रात्रि के अन्त में समस्त प्रकाशमान ग्रह और तारे पश्चिम की ओर चले जाते हैं, उसी प्रकार अश्वत्थामा के बाण भीमसेन के रथ पर पड़ने लगे।
 
King! Just as all the luminous planets and stars move towards the west at the end of the night, in the same manner Ashvatthama's arrows began falling on Bhimasena's chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)