श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.200.35 
अभिद्रुत्य च विंशत्या क्षुद्रकाणां नरर्षभ।
पञ्चभिश्चातिवेगेन विव्याध पुरुषर्षभ:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! निकट जाकर पुरुषोत्तम अश्वत्थामा ने पहले धृष्टद्युम्न को क्षुद्रक नामक बीस बाणों से घायल किया। फिर बड़े वेग से पाँच बाण मारकर उसे घायल कर दिया। 35॥
 
Narashrestha! Going closer, Ashwatthama, the man of men, first shot Dhrishtadyumna with twenty arrows named Kshudraka. Then he injured him by shooting five arrows with great speed. 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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