श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.200.32 
धृतराष्ट्र उवाच
तस्मिन्नस्त्रे प्रतिहते द्रोणे चोपधिना हते।
तथा दुर्योधनेनोक्तो द्रौणि: किमकरोत् पुन:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा- संजय! द्रोणाचार्य को छल से मारा गया और नारायणास्त्र का भी प्रतिकार कर दिया गया, फिर दुर्योधन के ऐसा कहने पर अश्वत्थामा ने क्या किया?
 
Dhritarashtra asked- Sanjay! Dronacharya was killed by deceit and even the Narayanastra was countered, then what did Ashvatthama do after Duryodhan said so?
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas