श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.200.30 
दुर्योधन उवाच
आचार्यपुत्र यद्येतद् द्विरस्त्रं न प्रयुज्यते।
अन्यैर्गुरुघ्ना वध्यन्तामस्त्रैरस्त्रविदां वर॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा- आचार्यपुत्र! आप समस्त शस्त्र विशेषज्ञों में श्रेष्ठ हैं। यदि इस शस्त्र का प्रयोग दो बार नहीं किया जा सकता तो आपको अन्य शस्त्रों से इन गुरुघातियों का वध कर देना चाहिए। 30॥
 
Duryodhana said – Son of Acharya! You are the best among all weapons experts. If this weapon cannot be used twice then you should kill these Gurughatis with other weapons. 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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