Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.200.3: भीमसेन, अपने घोड़े, सारथि और रथ सहित, द्रोणपुत्र के अस्त्र से ढके हुए अग्नि के समान प्रतीत हो रहे थे। वे आग की लपटों से इतने घिरे हुए थे कि उन्हें देखना कठिन हो रहा था। | mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीमसेन, अपने घोड़े, सारथि और रथ सहित, द्रोणपुत्र के अस्त्र से ढके हुए अग्नि के समान प्रतीत हो रहे थे। वे आग की लपटों से इतने घिरे हुए थे कि उन्हें देखना कठिन हो रहा था।
Bhimasena, along with his horse, charioteer and chariot, appeared like fire kept inside a fire, covered by the weapon of Drona's son. They were so surrounded by flames that it was difficult to look at them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥