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mahabharat 7.200.29: हार हो या मृत्यु, हार से मृत्यु अच्छी है। ये सब शत्रु पराजित हो गए; हथियार डालकर वे शव के समान हो गए। 29॥   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.200.29 
पराजयो वा मृत्युर्वा श्रेयान् मृत्युर्न निर्जय:।
विजिताश्चारयो ह्येते शस्त्रोत्सर्गान्मृतोपमा:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हार हो या मृत्यु, हार से मृत्यु अच्छी है। ये सब शत्रु पराजित हो गए; हथियार डालकर वे शव के समान हो गए। 29॥
 
Be it defeat or death, death is better than defeat. All these enemies were defeated; After laying down their arms, they became like dead bodies. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)