Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.200.28: जनेश्वर! श्रीकृष्ण ने इस अस्त्र का प्रतिकार करने का उपाय बताया है और उसका प्रयोग भी किया है; अन्यथा आज युद्ध में सभी शत्रु मारे गए होते॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.200.28 
एष चास्त्रप्रतीघातं वासुदेव: प्रयुक्तवान्।
अन्यथा विहित: संख्ये वध: शत्रोर्जनाधिप॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जनेश्वर! श्रीकृष्ण ने इस अस्त्र का प्रतिकार करने का उपाय बताया है और उसका प्रयोग भी किया है; अन्यथा आज युद्ध में सभी शत्रु मारे गए होते॥ 28॥
 
Janeshwar! Shri Krishna has told the way to counter this weapon and has also used it; otherwise all the enemies would have been killed in the war today.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)