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mahabharat 7.200.27: ‘राजन्! यह अस्त्र न तो वापस आता है और न इसका पुनः प्रयोग किया जा सकता है। यदि इसका पुनः प्रयोग किया जाए, तो यह प्रयोग करने वाले का ही नाश कर देगा, इसमें संशय नहीं है॥27॥   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.200.27 
नैतदावर्तते राजन्नस्त्रं द्विर्नोपपद्यते।
आवृतं हि निवर्तेत प्रयोक्तारं न संशय:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘राजन्! यह अस्त्र न तो वापस आता है और न इसका पुनः प्रयोग किया जा सकता है। यदि इसका पुनः प्रयोग किया जाए, तो यह प्रयोग करने वाले का ही नाश कर देगा, इसमें संशय नहीं है॥27॥
 
‘King! Neither does this weapon return nor can it be used again. If it is used again, it will destroy the person who used it, there is no doubt about it.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)