श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  7.200.20-21 
संजय उवाच
तस्मिन् प्रशान्ते विधिना तेन तेजसि दु:सहे।
बभूवुर्विमला: सर्वा दिश: प्रदिश एव च॥ २०॥
प्रववुश्च शिवा वाता: प्रशान्ता मृगपक्षिण:।
वाहनानि च हृष्टानि प्रशान्तेऽस्त्रे सुदुर्जये॥ २१॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! उस विधि से उस असह्य अग्नि के शान्त हो जाने पर समस्त दिशाएँ और उपदिशाएँ स्वच्छ हो गईं। शीतल सुखद वायु बहने लगी। पशु-पक्षियों का विलाप बन्द हो गया और उस अजेय अस्त्र के शान्त हो जाने पर समस्त वाहन भी प्रसन्न हो गए।
 
Sanjaya says - O King! After that unbearable fire was pacified by that method, all the directions and the sub-directions became clean. A cool pleasant breeze started blowing. The wailing of animals and birds stopped and after that unconquerable weapon was pacified, all the vehicles also became happy.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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