हे राजन! जब युद्धस्थल में द्रोणपुत्र के द्वारा सब राजा मारे जा रहे थे, तब वे भयभीत होकर भागकर सब दिशाओं में शरण लेने लगे ॥131-132॥
O King! When all the kings were being killed by Drona's son in the battlefield, they fled in fear and took refuge in all directions. ॥131-132॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि नारायणास्त्रमोक्षपर्वण्यश्वत्थामपराक्रमे द्विशततमोऽध्याय:॥ २००॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत नारायणास्त्रमोक्षपर्वमें अश्वत्थामाका पराक्रमविषयक दो सौवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २००॥