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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 129-130h
 
 
श्लोक  7.200.129-130h 
तत: सर्वे च पञ्चाला भीमसेनश्च पाण्डव:॥ १२९॥
धृष्टद्युम्नरथं त्यक्त्वा भीता: सम्प्राद्रवन् दिश:।
 
 
अनुवाद
तब पाण्डुपुत्र भीमसेन और समस्त पांचाल भयभीत होकर धृष्टद्युम्न का रथ छोड़कर सब दिशाओं में भाग गए।
 
Then Pandu's son Bhimasena and all the Panchalas became frightened and left Dhrishtadyumna's chariot and fled in all directions. 129 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)