Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.200.121-122h: तदनन्तर अस्त्रविद्या में निपुण द्रोणपुत्र ने अपने अस्त्रों की माया से बाणों की वर्षा को तुरन्त रोककर भीमसेन का धनुष काट डाला और क्रोध में भरकर युद्धस्थल में ही उसे अनेक बाणों से घायल कर दिया। | mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदनन्तर अस्त्रविद्या में निपुण द्रोणपुत्र ने अपने अस्त्रों की माया से बाणों की वर्षा को तुरन्त रोककर भीमसेन का धनुष काट डाला और क्रोध में भरकर युद्धस्थल में ही उसे अनेक बाणों से घायल कर दिया।
Then the son of Drona, a great expert in weapons, instantly stopped the shower of arrows with the magic of his weapons and cut off Bhimasena's bow. Also, filled with anger, he wounded him with numerous arrows on the battlefield. 121 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥