श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  7.200.120 
पुनश्च शरवर्षाणि घोराण्युग्राणि पाण्डव:।
व्यसृजद् बलवान् क्रुद्धो द्रोणपुत्रवधेप्सया॥ १२०॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर क्रुद्ध पाण्डुपुत्र बलवान भीमसेन ने द्रोणपुत्र को मारने की इच्छा से पुनः उस पर भयंकर एवं उग्र बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी ॥120॥
 
Then the enraged son of Pandu, the powerful Bhimasena, with the desire to kill Drona's son, again started raining fierce and furious arrows on him. 120॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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