श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 119
 
 
श्लोक  7.200.119 
तानन्तरिक्षे विशिखैैस्त्रिधैकैकमशातयत्।
विशेषयन् द्रोणसुतं तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत्॥ ११९॥
 
 
अनुवाद
परंतु भीमसेन ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करके उन बाणों को आकाश में ही अपने बाणों से तीन-तीन टुकड़े कर दिया और द्रोणपुत्र से कहा - 'खड़े रहो, खड़े रहो।'॥119॥
 
But Bhimasena, establishing his superiority, broke each of those arrows into three pieces in the sky with his arrows and said to Drona's son, 'Stand, stand.'॥ 119॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)