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mahabharat 7.200.118: महाराज ! तत्पश्चात् अश्वत्थामा ने भीमसेन को मारने की इच्छा से तेल से स्वच्छ किए हुए स्वच्छ सिरों वाले बहुत से सुवर्णमय बाण छोड़े ॥118॥   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  7.200.118 
तथा द्रौणिर्महाराज शरान् हेमविभूषितान्।
तैलधौतान् प्रसन्नाग्रान् प्राहिणोद् वधकाङ्क्षया॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
महाराज ! तत्पश्चात् अश्वत्थामा ने भीमसेन को मारने की इच्छा से तेल से स्वच्छ किए हुए स्वच्छ सिरों वाले बहुत से सुवर्णमय बाण छोड़े ॥118॥
 
Maharaj! Thereafter, Ashwatthama, with the desire to kill Bhimasena, fired many golden arrows with clean tips, cleaned with oil. 118॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)