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mahabharat 7.200.117: हे महाराज! जब ये बाणों की वर्षा हो रही थी, तब वायु भी उनके बीच से गुजरने में असमर्थ थी।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  7.200.117 
तयोर्विसृजतोरेवं शरजालानि मारिष।
वायुरप्यन्तरा राजन् नाशक्नोत् प्रतिसर्पितुम्॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज! जब ये बाणों की वर्षा हो रही थी, तब वायु भी उनके बीच से गुजरने में असमर्थ थी।
 
Honorable King! While these showers of arrows were going on, even the wind was unable to pass between them. 117.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)