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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  7.200.115 
तद् रुक्मपृष्ठं भीमस्य धनुर्घोरं महारणे।
विकृष्यमाणं विबभौ शक्रचापमिवापरम्॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
उस महायुद्ध में जब भीमसेन ने अपने स्वर्णमय पृष्ठ वाले भयंकर धनुष को खींचा, तो वह दूसरे इन्द्रधनुष के समान दिखाई देने लगा। 115.
 
In that great war, when Bhimasena's fearsome bow with a golden back was drawn, it appeared like another rainbow. 115.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)