| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन » श्लोक 112 |
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| | | | श्लोक 7.200.112  | तत्राद्भुतमपश्याम भीमसेनस्य विक्रमम्।
बलं वीर्यं प्रभावं च व्यवसायं च भारत॥ ११२॥ | | | | | | अनुवाद | | हे भारत! वहाँ हमने भीमसेन का अद्भुत पराक्रम, बल, साहस, प्रभाव और व्यापार देखा। | | | | Bharat! There we saw the wonderful valour, strength, courage, influence and business of Bhimasena. 112. | | ✨ ai-generated | | |
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