Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.200.106-107: तभी अश्वत्थामा ने भीमसेन की ओर देखा, जो अपना विशाल स्वर्ण-मंडित धनुष खींचकर निकट से बाणों की वर्षा कर रहे थे। वे शरद ऋतु की मध्याह्न में अपनी प्रखर किरणों से सूर्यदेव के समान चमक रहे थे। | mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तभी अश्वत्थामा ने भीमसेन की ओर देखा, जो अपना विशाल स्वर्ण-मंडित धनुष खींचकर निकट से बाणों की वर्षा कर रहे थे। वे शरद ऋतु की मध्याह्न में अपनी प्रखर किरणों से सूर्यदेव के समान चमक रहे थे।
Then Ashvatthama looked at Bhimasena, drawing his huge bow adorned with gold and showering arrows from close range. He was shining like the Sun God with his intense rays during the midday of autumn.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥