श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 105-106h
 
 
श्लोक  7.200.105-106h 
तलशब्दैस्ततो घोरैस्त्रासयन्तौ परस्परम्॥ १०५॥
अयुध्येतां सुसंरब्धौ कृतप्रतिकृतैषिणौ।
 
 
अनुवाद
फिर दोनों योद्धा भयंकर तालियों की ध्वनि से एक-दूसरे को भयभीत करते हुए भयंकर युद्ध करने लगे। दोनों एक-दूसरे के आक्रमण का प्रतिकार करना चाहते थे।
 
Then both the warriors started fighting furiously, frightening each other with the terrifying sound of clapping. Both wanted to counter each other's attack.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)