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mahabharat 7.200.100-101h: भरत! उसने धनुष को उसकी नोक तक खींचकर भीमसेन पर विषैले सर्पों के समान भयंकर सौ बाण छोड़े।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 100-101h
 
 
श्लोक  7.200.100-101h 
तत आकर्णपूर्णानां शराणां तिग्मतेजसाम्॥ १००॥
शतमाशीविषाभानां प्रेषयामास भारत।
 
 
अनुवाद
भरत! उसने धनुष को उसकी नोक तक खींचकर भीमसेन पर विषैले सर्पों के समान भयंकर सौ बाण छोड़े।
 
Bharata! Drawing his bow till its tip, he shot a hundred arrows, fierce and fierce like poisonous serpents, at Bhimasena.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)