वर्तमाने तथा युद्धे घोररूपे भयंकरे।
मोहयित्वा परान् द्रोणो युधिष्ठिरमुपाद्रवत्॥ ६३॥
अनुवाद
इस प्रकार जब भयंकर युद्ध चल रहा था, तब द्रोणाचार्य ने शत्रुओं को मोहित करके युधिष्ठिर पर आक्रमण किया।
Thus, when the fierce battle was going on, Dronacharya, by enchanting the enemies, attacked Yudhishthira. 63.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि संशप्तकवधपर्वणि संकुलयुद्धे विंशोऽध्याय:॥ २०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत संशप्तकवधपर्वमें संकुलयुद्धविषयक बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ६४ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)