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mahabharat 7.20.62: वहाँ सभी योद्धाओं पर बाणों की वर्षा हो रही थी। उनके निशान कहीं नष्ट नहीं हुए। ध्वजाएँ और अन्य निशान नष्ट हो जाने पर भी उनमें से कोई भी योद्धा फँसा नहीं। 62.   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  7.20.62 
शरवर्षाभिवृष्टेषु योधेष्वञ्चितलक्ष्मसु।
न तेष्वचित्ततां लेभे कश्चिदाहतलक्षण:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ सभी योद्धाओं पर बाणों की वर्षा हो रही थी। उनके निशान कहीं नष्ट नहीं हुए। ध्वजाएँ और अन्य निशान नष्ट हो जाने पर भी उनमें से कोई भी योद्धा फँसा नहीं। 62.
 
There, arrows were raining on all the warriors. Their marks were not lost anywhere. None of those warriors got trapped even after their flags and other marks were destroyed. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)