श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  7.20.61 
तं वाहनमहानौभिर्योधा जयधनैषिण:।
अवगाह्याथ मज्जन्तो नैव मोहं प्रचक्रिरे॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
विजयरूपी धन की इच्छा रखने वाले योद्धारूपी व्यापारी वाहनरूपी बड़ी-बड़ी नौकाओं में बैठकर युद्धरूपी समुद्र में उतर पड़े और डूबते हुए भी अपने प्राणों की परवाह न की।
 
The warrior-like traders, desirous of the wealth of victory, entered the sea of ​​war in large boats in the form of vehicles and even while drowning, were not attached to their lives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)