श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  7.20.60 
सगजौघमहावेग: परासुनरशैवल:।
रथौघतुमुलावर्त: प्रबभौ सैन्यसागर:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
हाथियों के झुंड के महान वेग, मृत मनुष्यों के जुलूस और रथरूपी भयंकर भँवरों के कारण सेनाओं का वह समुद्र अद्भुत शोभा पा रहा था।
 
That sea of ​​armies was looking wonderfully beautiful due to the great velocity of the herd of elephants, the procession of dead men and the fierce whirlpools in the form of chariots. 60.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)