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mahabharat 7.20.6-8h: भूतशर्मा, क्षेमशर्मा, वीर करकश, कलिंग, सिंहल, पूर्व दिशा के वीर आभीर, दाशेर्क, शक, यवन, कम्बोज, शूरसेन, दर्द, मद्र, केकय तथा हंसपथ नामक देश के निवासी, तथा उत्तम कवच धारण किये हुए वीर हाथी, घुड़सवार, रथी तथा पैदल सैनिकों के समूह गरुड़ के गले में खड़े थे।   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 6-8h
 
 
श्लोक  7.20.6-8h 
भूतशर्मा क्षेमशर्मा करकाशश्च वीर्यवान्।
कलिङ्गा: सिंहला: प्राच्या: शूराभीरा दशेरका:॥ ६॥
शका यवनकाम्बोजास्तथा हंसपथाश्च ये।
ग्रीवायां शूरसेनाश्च दरदा मद्रकेकया:॥ ७॥
गजाश्वरथपत्त्योघास्तस्थु: परमदंशिता:।
 
 
अनुवाद
भूतशर्मा, क्षेमशर्मा, वीर करकश, कलिंग, सिंहल, पूर्व दिशा के वीर आभीर, दाशेर्क, शक, यवन, कम्बोज, शूरसेन, दर्द, मद्र, केकय तथा हंसपथ नामक देश के निवासी, तथा उत्तम कवच धारण किये हुए वीर हाथी, घुड़सवार, रथी तथा पैदल सैनिकों के समूह गरुड़ के गले में खड़े थे।
 
Bhutasharm, Kshemasharma, the valiant Karakash, soldiers from Kalinga, Singhala, the east, the valiant Abhiras, the Dasherkas, the Shakas, the Yavanas, the Kambojas, the Shurasenas, the Dardas, the Madras, the Kekayas and the residents of the countries named Hanspath, and groups of valiant elephant riders, horse riders, charioteers and infantry soldiers, wearing excellent armour, were standing around Garuda's neck.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)