श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  7.20.58 
शोणितै: सिच्यमानानि वस्त्राणि कवचानि च।
छत्राणि च पताकाश्च सर्वं रक्तमदृश्यत॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
योद्धाओं के वस्त्र, कवच, झंडे और पताकाएँ खून से लथपथ थे। वहाँ सब कुछ लाल, खून से रंगा हुआ लग रहा था। 58.
 
The warriors' clothes, armour, flags and banners were soaked in blood. Everything there looked red, dyed in blood. 58.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)