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mahabharat 7.20.56: वहाँ पिता ने पुत्र को और पुत्र ने पिता को मार डाला। इतना भयंकर युद्ध चल रहा था कि किसी को कुछ पता ही नहीं चल रहा था।   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  7.20.56 
जघानात्र पिता पुत्रं पुत्रश्च पितरं तथा।
इत्यासीत् तुमुलं युद्धं न प्राज्ञायत किंचन॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पिता ने पुत्र को और पुत्र ने पिता को मार डाला। इतना भयंकर युद्ध चल रहा था कि किसी को कुछ पता ही नहीं चल रहा था।
 
There the father killed the son and the son killed the father. Such a fierce battle was going on that no one could know anything.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)