श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.20.55 
रथाश्च रथिभिर्हीना निर्मनुष्याश्च वाजिन:।
हतारोहाश्च मातङ्गा दिशो जग्मुर्भयातुरा:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
सारथिहीन रथ, सवारहीन घोड़े और मारे गए सवारों वाले हाथी भय से व्याकुल होकर सब ओर भाग रहे थे ॥ 55॥
 
Chariots devoid of charioteers, horses devoid of riders and elephants whose riders had been killed were fleeing in all directions, distraught with fear. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)