श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  7.20.54 
प्रमथ्य च विषाणाग्रै: समुत्क्षिप्ताश्च वारणै:।
सचक्राश्च विचक्राश्च रथैरेव महारथा:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
बहुत से हाथियों ने अपने दाँतों के अगले भाग से बड़े-बड़े रथों को, चाहे पहिये वाले हों या बिना पहिये वाले, सारथि सहित तोड़ डाला और अपनी सूँडों से उन्हें दूर फेंक दिया ॥54॥
 
Many elephants smashed large chariots, both with wheels and without wheels, along with their charioteers with the front part of their tusks and threw them away with their trunks. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)