श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.20.53 
गजाश्वरथयोधानां शरीरौघसमावृता।
बभूव पृथिवी राजन् मांसशोणितकर्दमा॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वहाँ की भूमि हाथी, घोड़े और रथी योद्धाओं के शवों से ढकी हुई थी तथा रक्त और मांस के कीचड़ से ढकी हुई थी।
 
King! The ground there was covered with the corpses of elephants, horses and chariot warriors and was covered with a sludge of blood and flesh. 53.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)