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mahabharat 7.20.52: बाणों से घायल हुए अनेक हाथी सारसों की तरह चिंघाड़ते हुए अपने तथा शत्रु के सैनिकों को कुचलते हुए चारों दिशाओं में दौड़ रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  7.20.52 
क्रौञ्चवद् विनदन्तोऽन्ये नाराचाभिहता गजा:।
परान् स्वांश्चापि मृद्नन्त: परिपेतुर्दिशो दश॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
बाणों से घायल हुए अनेक हाथी सारसों की तरह चिंघाड़ते हुए अपने तथा शत्रु के सैनिकों को कुचलते हुए चारों दिशाओं में दौड़ रहे थे।
 
Many elephants, wounded by arrows, were trumpeting like cranes and were running in all directions, trampling their own and the enemy's soldiers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)