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mahabharat 7.20.49: उनके पर्वताकार शरीरों के गिरने से सब ओर से आघात पाकर भूमि सहसा काँपने लगी और पीड़ा से चीखने लगी ॥49॥   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  7.20.49 
तेषां शैलोपमै: कायैर्निपतद्भि: समन्तत:।
आहता सहसा भूमिश्चकम्पे च ननाद च॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
उनके पर्वताकार शरीरों के गिरने से सब ओर से आघात पाकर भूमि सहसा काँपने लगी और पीड़ा से चीखने लगी ॥49॥
 
The ground, struck from all sides by the fall of their mountain-like bodies, suddenly began to tremble and cry out in pain. ॥49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)